Wednesday, April 14, 2010

बधाई हो .....

पन्द्रह आलू नान, तीस प्लेट शाही पनीर , अठ्ठारह गुलाब जामुन , दो प्लेट बूंदी रायता और तीन कोन आइसक्रीम ! फिर मुट्ठी भर सौंफ का मज़ा लेकर कुछ भी कहो बंधुओ मज़ा अगया !

कल रात खूब चांप कर मुफत का खाना खाए है हम ! अब तो आप भी समझ ही गए होंगे कि मैं केवल नाम का ही नहीं काम का भी ब्राह्मण है !
आप लोग सोच रहे होंगे कि किस गरीब का "बठ्ठा" बैठा होगा जिसने मुझ जैसे दरिद्र ब्राह्मण पर अपनी दयादृष्टि दिखलाई !

तो जनाब .....परसों कि बात है रात में हम सत्तू फांक कर सो ही रहे थे !

( हम जब अपने घर में खाना खाते है तो केवल सत्तू ही फांकते है क्योकि और कुछ होता नहीं है ब्राह्मण के घर में सिवाय सत्तू के ! )

तभी अचानक थाली के बजने कि आवाज सुनाई दी हम तुरंत भांप गए कि पड़ोस में राधा भाभी ने खुश खबरी दे दी !

"अब तो कल का भोजन पक्का समझो ...."

इसी उत्सुकता में हमने दरवाजा खोला और खुद भी लगे चिल्लाने अजी बधाई हो ........! लल्ला के जन्म पर बधाई हो ! लल्ली के जन्म पर बधाई हो ! लल्ला लल्ली के जन्म पर आप सबको बधाई हो ! थाली बजाओ बधावे गाओ ......

एक अरब से ज्यादा जनसँख्या वाले देश को बाल बच्चो के अधिक उत्पादन कि जरूरत है !

अजी... आप तो बिना मतलब के गरम हो रहे है ....यूँ ही आजकल पारा पैंतालीस के आस पास चल रहा है ! क्या हुआ जो हमने उत्पादन शब्द का प्रयोग कर दिया ? क्या उत्पादन सिर्फ गेहूँ , मक्का , चावल , मोठ, मटर, अरहर का ही होता है ?

हमारे देश में भोले भाले स्त्री पुरुष मिलजुलकर प्रतिदिन माफ़ करना प्रतिरात संतानोत्पादन कर रहे है ! क्या इसे उत्पादन नहीं कहा जा सकता ?

आप हमसे सहमत हो या ना हो पर हमारे देश कि विडंबना यह ही है कि लोकतंत्र ने मानव को हथियार बना दिया है एक टूल बना दिया है एक उपकरण बना दिया है !

आदमी हथियार है पैसा बनाने का , आदमी उपकरण है पैसा कमाने का ! अब तो यह कहा जा रहा है कि बढ़ी हुई जनसँख्या भी वरदान है देश के लिए और मज़े कि बात यह है कि यही लोग कुछ बरस पहले नसबंदी जैसा राग भी बजाते थे !

अब देखिये चीन में एक परिवार सिर्फ एक ही बच्चा पैदा कर सकता है ! और जापान में सरकार अपने नागरिको से कह रही है कि बच्चे ज्यादा पैदा करो ! और अपने यहाँ धडाधड जनसँख्या बढ़ रही है !

भारत कि जनसँख्या वरदान है इसलिए भी बताया जा रहा है क्योकि यहाँ कि युवा शक्ति दुनिया में सबसे ज्यादा है ! पर

भैया ......जब यह युवा बूढ़े होंगे तब क्या होगा ? पूत के पांव तो पालने में ही दिखते है ! आजकल हमारा समाज बूढ़े लोगो कि कितनी इज्जत करता है यह तो जग जाहिर है !

लोग अपने बूढे मात पिता को को उनके हाल पर छोड़ देते है ! फिर अपनी विदेशी सरकार माफ़ करना NRI सरकार भी पेंशन बंद करने में जुटी है !

इसका मतलब जब तक तू जवान तब तक तू नवाब और बूढा होते ही मर जाकर कहीं भी !

इतनी भारी जनसँख्या के पक्ष में बोलने वालो को अपना आज तो सुरक्षित और खुशहाल लग रहा है ! लेकिन कल कि तरफ वो देख ही नहीं रहे ! अब सरकार कि सरकार जाने हम तो बस इतना ही कहेंगे कि भाई ....जो भी करना है सोच समझ कर करो कहीं ऐसा ना हो कि पानी का घड़ा एक हो और पीने वाले सौ .....प्यासे ही मर जाओगे !

और मेरे पास तो बिल्कुल भी मत आना मैं खुद लोगो के बुलावे पर मुफत में पेट भर कर खाना खाता हूँ और दबा कर पानी भी पीता हूँ !

1 comment:

  1. साधुवाद...हंसी-हंसी में आपने एक गंभीर समस्या की ओर ध्यान आकर्षित किया है.संसाधनों पर जनसंख्या दबाव बढ़ रहा है. इस ओर ध्यान देना आवश्यक है.

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