Thursday, February 4, 2010

धीरे-धीरे बोल कोई सुन न ले.........

सुना है !!! किसी से कहना मत..... हिन्दुस्तान में केवल 1,411 टाईगर ही रह गए........ताज्ज़ुब है ! अब टाईगर भी बचाना होगा पहले तो सिर्फ वृक्ष , पानी , धरती ,कागज़, बिजली ही बचाना होता था! अब टाईगर भी बचाना होगा ! बरसो से सिर्फ देख ही रहा हूँ ! कभी यह बचाओ, कभी वो बचाओ!!! एक नन्ही सी जान और क्या क्या बचाए और क्या क्या गवाए ....... वो अलग बात है कि जिस टाईगर को बचाने कि कोशिश कि जा रही है ! उस ही टाईगर के जबड़े में फसें हुए इंसान को बचाने कोई नहीं आता! खैर रहने दीजिये जनाब हम क्यों लिखे इंसानों के इस दरियादिली के विषय में किसी को बुरी लग जाये तो टाईगर बाद में इंसान पहले खा जायेगा ! चलो टाईगर के विषय में लिखते है कम से कम वो पढ़ तो नहीं सकेगा और उसको बात बुरी भी नहीं लगेगी ! और मेरा लिखना सार्थक हो जायेगा .........सोचो अगर टाईगर इंसानों कि बस्ती में आ जाये ! जैसा कि कई बार आ भी चुके है ! तो उस वक़्त टाईगर के मन में क्या चलता होगा??? मै बताता हूँ न चिंता क्यों करते हो ? उस वक़्त उस टाईगर के मन में इंसानों से भरी हुई बस्ती , शहर को देखकर, उसके मन में बाद में सबसे पहले तो उसके मुहँ में पानी आ जाता है ....और फिर रही सही कसर उसके मन में कुछ भाव उत्पन्न होते है और आप मानोगे नहीं इंसानों को देखने के बाद उसका भी मन अंग्रेजी में बोल उठता है ! wow !!! there are lot's of yummy and delicious people !!!!! अब बताइए जनाब उसको तो हम इंसान तंदूरी मुर्गे दिखते है! वो भी बिना नमक और मिर्च के खा जायेगा! और तो और हमारा बलिदान तक भी कोई याद नहीं रखेगा खैर , जो काम "वन संरक्षण विभाग" का है उस काम कि भी अपील हमसे कि जा रही है ! एक गरीब आदमी क्या करने जंगल जायेगा और क्या उसकी अवकात जो टाईगर को मार गिराएगा ! ये सब अमीरों के चोंचले है! शिकार करना इत्यादि इधर आम आदमी महंगाई, बेरोज़गारी, और रोज़ी रोटी का खुद शिकार है ! इससे बड़ा न कोई टाईगर है न कोई भूत और अगर अब भी ये लगता है कि मेरा लिखना व्यर्थ है तो ठीक है भाईसाहब !!! माफ़ कीजियेगा पर .....धीरे धीरे बोल कोई सुन न ले..........
जय हिंद !
विनय पाण्डेय

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