Monday, March 15, 2010

हम तो डूबेंगे सनम तुम्हे साथ लेकर

"हम तो डूबेंगे सनम तुम्हे साथ लेकर "

लोग कहते है मरता हुआ आदमी कभी झूठ नहीं बोलता ! इसलिए पुलिस और अदालत भी मृत्यु से पहले दिए बयान पर बड़ा यकीन करती है ! पर कुछ लोग ऐसे "घाघ" होते है जो मरणोपरांत भी परेशान करते है ! मेरे गाँव का एक किस्सा लिखता हूँ - मेरे गाँव में एक चोर रहता था हालाँकि कभी गिनती नहीं कि थी मैंने कि कितने चोर थे बस ऐसे ही लिख दिया और अब तो आप लोगो कि भी मजबूरी बन गयी है कि इसको पढे क्योकि

" एक बार जो मैंने write कर दिया तो फिर मै अपने आप भी उसको delete नहीं सकता"

बहरहाल, चोरो के भी अपने सिद्धांत होते है प्राय: वो अपनी बस्ती में चोरी चकारी नहीं करते ! किन्तु वो मेरे गाँव का चोर तो अपने ही आस पड़ोस में हाथ साफ़ कर लेता था ! उससे गाँव वाले बड़े परेशान थे ! जब चोर बूढ़ा हुआ तो एक दिन उसने सभी गाँव वालो को अपने पास बुलाया और कहा - भाइयों ! आप लोगो के दिल में मेरे लिए बेहद नाराज़गी है! क्रोध है ! मेरे जीते जी तो आप मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सके किन्तु आज जब मै मरने वाला हूँ तो आप लोग अपनी सारी भड़ास मुझपर निकाल लेना और मेरी लाश को डंडे से पीटना , मेरे कलेजे में चाक़ू भोंक देना , जिससे आप लोगों के दिलो में जल रही प्रतिशोध कि ज्वाला शांत हो जाये ! और वैसे भी यह देह तो मिट्टी कि है जो कि मरने के बाद मिट्टी में ही मिल जाएगी ! बेचारे गाँव वालो ने उस चोर कि आखरी ख्वाइश और अपनी भड़ास निकलने के लिए वैसा ही किया उसकी लाश को खूब पीटा और जब वे यह कर रहे थे ठीक उस ही समय पुलिस आ गयी ! पुलिस ने आरोप लगाया कि गाँव वालो ने उसका क़त्ल किया है ! असल में उस "घाघ" चोर ने एक दिन पहले ही पुलिस को चिट्ठी लिख दी थी ! "कि मेरी जान को खतरा है " बेचारे भोले भले लोग फंस गए ! तो साहब, कई बार आदमी मरते मरते भी झोलझाल कर देता है !

मरते समय भी आदमी कि जान मोह माया में अटकी रहती है !
हमारी सोसाइटी के ही जाने माने हलवाई दादा कि जब अंतिम घड़ी आई तो उन्होंने अपनी पत्नी को अपने पास बुलाया और कहा - मेरे मरने के बाद तुम मेरी दूकान बड़े बेटे "कल्लू " को दे देना पत्नी ने कहा - अजी "कल्लू" तो अच्छा है क्यों ना हम दूकान "बल्लू" को दें दें ? हलवाई दादा अपनी पत्नी कि बात मान गए ! वे आगे बोले - अच्छा जितने भी जेवर है वो बेटी "पद्मा" को दे देना इसपर पत्नी बोली -अजी........ पद्मा का कन्यादान तो हो गया है क्यों ना वो जेवर हम बिट्टू कि बहु को दें दें ? यह सुनते ही हलवाई दादा चीखे - अरे............ मुझे एक बात बता कि मर मै रहा हूँ या तू.........!

एक और बात ........ ना जाने क्यों अपने यहाँ आदमी के मरते ही उसके सात खून माफ़ हो जाते है ? एक प्रोपर्टी डीलर ने लोगो को सैकड़ों फर्जी प्लाट बेचे ! एक ज़मीन का टुकड़ा नौ लोगो को बेच दिया ! करोड़ों का घोटाला कर के मर गया ! उसके मरते ही वो "स्वर्गवासी" हो गया पर जिनका पैसा खा कर मरा वे लोग आज भी रो रहे है ! मज़े कि बात तो यह है कि उस प्रोपर्टी डीलर के घर वालों ने तीन दिन तक थूक के आंसू लगाये और बाद में "लड्डू" "पेडे" उडाये और जिन्होंने उससे ज़मीने खरीदी वो लोग आज तक सच्चे आंसू बहा रहे है !
और शायद ऐसे ही लोगो को ध्यान में रख कर ही यह कहा गया कि "हम तो डूबेंगे सनम तुम्हे साथ लेकर"

विनय पाण्डेय

2 comments:

  1. चोर ने दिया क्या घिस्सा, बढ़िया लगा ये किस्सा

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  2. जोर का झटका धीरे से दे गये ।

    कृपया वर्ड-वेरिफिकेशन हटा लीजिये
    वर्ड वेरीफिकेशन हटाने के लिए:
    डैशबोर्ड>सेटिंग्स>कमेन्टस>Show word verification for comments?>
    इसमें ’नो’ का विकल्प चुन लें..बस हो गया..कितना सरल है न हटाना
    और उतना ही मुश्किल-इसे भरना!! यकीन मानिये

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