Wednesday, March 17, 2010

मन + २ = मन्टू !!

मन + २ = मन्टू !!

जी हाँ जनाब ! यह वह सच है जिसपर से आज मै पर्दा उठा रहा हूँ ! मन्टू !

ना ....ना ....ना ....यह कोई चरित्र नहीं है और ना ही गणित का कोई मुश्किल समीकरण ! बल्कि यह तो चरित्रहीन है ! इस समाज का सबसे अधिक मनोविकृत चीज़ है !

"मन्टू" ना जाने मेरे खानदान वालो को क्या सूझा जो मेरे बचपने में मेरा घरेलु अथवा Pet Name जिसे हिंदी में 'पालतू नाम' कहे ! "मन्टू" रख दिया !

मै उस दिन को आज तक कोस रहा हूँ ! चलिए आज इसी का नाम का 'पोस्टमार्टम' करते है ! इस नाम के कई अर्थ है - पहला जिसके पास दो 'मन' हो - जो कि मेरे पास है ही नहीं यहाँ एक के ही लाले पड़े हुए है दूसरा कहाँ से लाये ! दूसरा जिसका वजन कम से कम दो (Quintal) हिंदी में 'दो - मन' का हो!

पर हाय रे ........भाग्य कि भारी विडंबना............ ऊपर वाले ने ना जाने मुझसे किस जन्म कि बैर निकला कि इस देह में बोटी घुसाना ही भूल गया और वजन रखा महज पाव भर का !

बहरहाल ......बड़े बड़े योगी भोगी एक सवाल पूछते है कि इस सकल सृष्टी में सर्वाधिक गति किसकी है ? तो जवाब सिर्फ इतना ही मिलता है कि ध्वनी और प्रकाश ! प्रकाश के सामने तो ध्वनि भी एक बच्ची जैसी लगती है ! प्रकाश एक सैकंड में लगभग एक लाख किलोमीटर का फासला तय करता है ! लेकिन यह प्रकाश भी बच्चा नज़र आता है जब "मन"कि गति कि बात आती है !

किसी ने खूब कहा है - मन लाभी मन लालची मन चंचल मन चोर !
मन के मति मति चालिए पलक पलक में ओर !!

यह मन ही तो है जो कभी चंद्रमा , कभी सूर्य , कभी अमेरिका , कभी रूस तक ले जाता है वो भी बिना उड़े, बिना चले इसे ना कभी किसी पासपोर्ट कि जरुरत थी ना वीजा कि और ना ही किसी सिक्यूरिटी कि शायद इसीलिए मन को कभी चंचल कभी पापी कहा जाता है ! दूसरे के मन कि बात को जानना आसान नहीं ! हालाँकि कुछ लोग दावा जरुर करते है कि हम मन को पढ़ लेते है ! अरे सरकार दूसरे कि मन को छोड़ो आदमी खुद के मन को भी नहीं पढ़ सकता क्योकि ना जाने इस "मन" में कितने परदे होते है !

लेकिन यह खबर जब से हमने सुनी है कि अब ऐसे कंप्यूटर इजात होने वाले है जो मन कि बाते पढ़ सकेंगे तब से हमारी ऊपर कि सांस ऊपर नीचे कि नीचे रह गयी है ! राम कसम हम तो शर्म से ही गड़े जा रहे है ! कि हम भीतर से क्या है और किसके बारे में क्या क्या सोचते है यह अगर कंप्यूटर को पता चल जायेगा तो हम तो गए ना बारह के भाव में !

मसलन एक पति अपनी पत्नी के विषय में कितने शुद्ध और पवित्र विचार रखता है यह तो उस पति के अलावा कोई नहीं जानता ! कभी- कभी ऐसा भी होता है कि आप ऊपर से तो किसी मित्र कि तारीफ़ के पुल बांधते है पर अन्दर ही अन्दर उसके प्रति कितना अगाध प्रेम है यह अगर कंप्यूटर बता दिया तो ? ऐसे में सड़क पर पाए जाने वाले प्रेमियों कि जरुर चांदी हो जाएगी वो सिर्फ उस ही लड़की से इजहार - ए- मोहाब्बत करेंगे जिस लड़की के ह्रदय में उनके लिए कुछ - कुछ होता हो ताकि करन जौहर का भी भला हो सके!

अजी...... आग लगे ऐसी मशीन को यह दुनिया परदे कि आड़ में ही ताड़ रही है ! ताड़ने दीजिये क्यों किसी को बे पर्दा करना ? वैसे तो हमारा भी "मन" कुछ - एक खुशकिस्मत लोगो को लात , मुक्का , जूते मारने का करता है पर वो सब हमसे तगड़े - तगडे है कहीं पता चल गया तो ख्वामखा मेरे नाम के आगे "था" शब्द लग जायेगा ! और इसी डर से हम आज तक उन खुशकिस्मत लोगो कि खुशामद करते रहते है ! और क्या क्या परिणाम होंगे वो सब लिखने कि जरुरत नहीं है आप लोग तो है ही समझदार !

एक फार्मूला - यदि जीवन में खुश रहना है तो अपने मन के किवाड़ को किसी के सामने मत खोलना ! जो भी खरे- खोटे करम करो उन्हें दिल की कोठडी में ही छिपाए रखना ! क्योकि जिस तरह दिल तो बच्चा है जी तो उस ही तरह वो बच्चा नंगा भी है जी !

विनय पाण्डेय

2 comments:

  1. विनय जी अच्छा व्यंग है सबसे ज्यादा आपका फार्मूला बहुत पसन्द आया.

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  2. koi toh hai jis ko kam s e kam naamo ka pata hai verna is nirmuhi duniya me log sab bhul gaye hai

    luv you boss really love you

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